5 Essential Elements For “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”

ऐसा करके वे माता से शांति की प्रार्थना कर सकते हैं.

मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें।

इस तरह नवरात्रि के पूरे दिनों में मां की आराधना करें।

मंत्र : ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा

अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।

गुप्त नवरात्रि हिंदू सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक समय मानी जाती है। यह नवरात्रि विशेष रूप से गुप्त साधनाओं, तांत्रिक अनुष्ठानों, और महाविद्या की उपासना के लिए मनाई जाती है। इसे गुप्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी साधनाएं और अनुष्ठान गुप्त रूप से किए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आत्म-शुद्धि, शक्ति संचय और देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करना है।

* पितृदोष और कालसर्प दोष जैसे click here दोषों को दूर करती हैं।

घट (कलश) स्थापना नवरात्रि पूजा का प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यह शुभता, ऊर्जा, और देवी दुर्गा की उपस्थिति का प्रतीक है।

* शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं।

गुप्त नवरात्रि में करें ये साधना, जो चाहोगे वो मिलेगा

Uday Navratri, generally known as Prakat Navratri, is thoroughly celebrated from north to south and east to west with great enthusiasm and zeal. They symbolize Group events with a message of devotion and triumph of excellent around evil.

भुवनेश्वरी : ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौ: भुवनेश्वर्ये नम: या ह्रीं।

कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित करें।

कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं।

छिन्नमस्ता : श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा:।

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